दुर्गासप्तशती का असुर पाठ

-अश्विनी कुमार पंकज हम सबने मार्कण्डेय पुराण में वर्णित ‘दुर्गासप्तशती’ की कथा या तो पढी है या सुनी है या फिर दुर्गा पूजा अथवा नवरात्रि के धार्मिक आयोजन से थोड़े-बहुत जरूर परिचित हैं। हम आपको एक मुण्डा आदिवासी कथा सुनाते हैं। कथा इस प्रकार है : जंगल में एक भैंस और भैंसा को एक नवजात … पढ़ना जारी रखें दुर्गासप्तशती का असुर पाठ

महिषासुर पुस्तिका मोबाइल पर

महिषासुर पुस्तिका का नया संस्‍करण मोबाइल एप ‘मात्रु भारती’ पर भी। यानी, अब देश के करोडों हिंदी भाषी लोगों के लिए बस एक क्लिक पर उपलब्‍ध। पढिए और पढाइए! पढ़ना जारी रखें महिषासुर पुस्तिका मोबाइल पर

फारवर्ड प्रेस: खोये हुए इतिहास का अनुसंधान

‘फारवर्ड प्रेस’ इस विस्मृत परंपरा और इतिहास के अनुसंधान की दिशा में जो कार्य कर रहा है, उसका ऐतिहासिक महत्व है। अपने आलेखों द्वारा वह मिथक, धर्म, इतिहास, संस्कृति और परम्परा के साथ साहित्य, मीडिया, फिल्म, पत्रकारिता आदि की भी गहन पड़ताल कर रहा है तथा समाज में आ रहे बदलावों पर भी तीक्ष्ण नजर रखे हुए है। फारवर्ड प्रेस का मानना है कि संस्कुति समाज और अर्थव्यस्था का नियंता होता है। इसलिए परिवर्तन की पहली डगर यहीं से शुरु होती है। इस पत्रिका का उद्देश्य ‘वास्तविक इतिहास की खोज’ तथा ‘खोई हुई संस्कृति के पुनर्जीवित’ करने का प्रयास है पढ़ना जारी रखें फारवर्ड प्रेस: खोये हुए इतिहास का अनुसंधान

हर पाठ महत्‍वपूर्ण है

कई प्राचीन मंदिरों में दुर्गा के विभिन्‍न रूपों की मूर्तियां गधा पर बैठी मिलती हैं। साेचिए, ऐसा क्‍यों है? गधा पर बैठाया जाना अपमान का प्रतीक है। बुरा काम करने वाले गधा पर बैठाए जाते हैं। आखिर क्‍यों प्राचीन काल से ही कुछ समुदाय दुर्गा को गधा पर बैठा हुआ दिखाते हैं? पढ़ना जारी रखें हर पाठ महत्‍वपूर्ण है

गणना नहीं, नीतियों का कार्यान्‍वयन महत्‍वपूर्ण है

नीतीश जी ने एक बातचीत के क्रम में एक बार मुझसे कहा था, ‘मैं वह काम करने जा रहा हूं मणि जी, जिसे कम्युनिस्ट भी नहीं कर सके। संभव है इसके बाद मुझे गोली खानी पड़े। लेकिन मैं करूंगा। मैं भूमि सुधार को कार्यरूप देने जा रहा हूं।’ मैंने स्तब्ध होकर उनकी बातें सुनीं। भावना के अतिरेक में मुझे वे दिव्य दिखने लगे। लेकिन जो हुआ वह आप सब जानते हैं पढ़ना जारी रखें गणना नहीं, नीतियों का कार्यान्‍वयन महत्‍वपूर्ण है

पाटीदार आंदोलन के संदर्भ में जनता से अपील

इस आंदोलन के बहाने न सिर्फ खुले तौर पर आरक्षण को आर्थिक आधार पर लागू करने को लेकर बहस चलाने की कोशिश की जा रही है बल्कि बहुजन (दलित-ओबीसी व अल्‍पसंख्‍यक) एकता को भी खंडित करने की कोशिश की जा रही है। आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल और उनसे जुडी हिंदूत्‍ववादी शक्तियों के निम्‍नांकित मुख्‍य उद्देश्‍य प्रतीत होते हैं पढ़ना जारी रखें पाटीदार आंदोलन के संदर्भ में जनता से अपील

हिंदी क्षेत्र के लिए पाटीदार आंदोलन के मायने

गुजरात की पाटीदार जाति प्राय: ‘पटेल’ सरनेम का उपयोग करती है। वहां इस जाति में चार प्रमुख उपजातियां हैं। ‘लेऊवा (लेवा) पटेल’, ‘कडवा पटेल’, ‘अनजाना पटेल (चौधरी पटेल)’ और ‘मटिया पटेल’। इनमें चौधरी और मटिया पटेल पहले से ही आरक्षण के दायरे में आते हैं। लेऊवा और कडवा पटेलों को आरक्षण से बाहर रखा गया है। अब सवाल यह उठता है कि हिंदी पट्टी में कौन सी जातियां इन पटेलों के समकक्ष हैं? पढ़ना जारी रखें हिंदी क्षेत्र के लिए पाटीदार आंदोलन के मायने