दुर्गासप्तशती का असुर पाठ

-अश्विनी कुमार पंकज हम सबने मार्कण्डेय पुराण में वर्णित ‘दुर्गासप्तशती’ की कथा या तो पढी है या सुनी है या फिर दुर्गा पूजा अथवा नवरात्रि के धार्मिक आयोजन से थोड़े-बहुत जरूर परिचित हैं। हम आपको एक मुण्डा आदिवासी कथा सुनाते हैं। कथा इस प्रकार है : जंगल में एक भैंस और भैंसा को एक नवजात … पढ़ना जारी रखें दुर्गासप्तशती का असुर पाठ

संविधान दिवस से जुड़ी साक्षात्कार की प्रश्नावली

यह प्रश्‍नावली श्री एचएच दुसाध, संस्‍थापक ‘बहुजन डाय‍वर्सिटी मिशन’ ने अपनी प्रकाश्‍य पुस्‍तक ‘कैसे हो संविधान के उद्देश्यों की पूर्ति’ के लिए भेजी है। एचएल दुसाध : प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 26 नवम्बर को अब से ‘संविधान दिवस ‘के रूप में मनाये जाने की घोषणा को कई लोग शंका की नजर से देख रहे हैं.ऐसे लोगों … पढ़ना जारी रखें संविधान दिवस से जुड़ी साक्षात्कार की प्रश्नावली

इस तरह मैं महिषासुर दिवस के आयोजन से जुडी

डॉ. सौरभ सुमन प्रखर प्रतिभा के धनी, सुदर्शन व्यक्तित्व के धारक, सुतीक्ष्ण मेधा-शक्ति, अप्रतिम, योद्धा गोपवंशी  महिषासुर के चरणों में एक फूल अर्पित् करते हुए मैंने अतीत के सपनों में डुबकर कुछ बातें समझी हैं, जो शायद भारत के विकास की डुबती नैंया को बचा ले। महिषासुर को खलनायक बनाने की साजिश सत्ता में काबिज … पढ़ना जारी रखें इस तरह मैं महिषासुर दिवस के आयोजन से जुडी

भाषाविज्ञान के आईने में महिषासुर

डाॅ. राजेन्द्रप्रसाद सिंह जैसा कि विदित है कि ‘‘महिषासुर’’ मूल रूप से ‘‘महिष’’ और ‘‘असुर’’ शब्दों का संयोग है। ‘‘महिष’’ का सर्वाधिक पुराना अर्थ ‘‘महा शक्तिमान्’’ है। यह ‘‘मह्’’ धातु में ‘‘इषन’’ प्रत्यय जोड़कर बना है, जिसमें गुरुता का भाव है। गुरुता का भाव लिए ‘‘मह्’’ धातु से अनेक षब्द बने हैं; यथा महा, महान, … पढ़ना जारी रखें भाषाविज्ञान के आईने में महिषासुर

उत्‍तर भारत को पेरियार की जरूरत है

अपने सामाजिक आंदोलनों को आगे बढाने के लिए उत्‍तर भारत को पेरियार की जरूरत है, और दक्षिण भारत को फुले की। इस आदान-प्रदान के बिना दोनों अधूरे हैं। इन दोनों भौगोलिक क्षेत्रों के सामाजिक आंदोलनों के बीच आम्‍बेडकर एक पुल की तरह पहले से ही मौजूद हैं। इस मजबूत पुल की सार्थकता तभी होगी, जब … पढ़ना जारी रखें उत्‍तर भारत को पेरियार की जरूरत है